* चेकपोस्ट अमले पर पेट माफिया का हमला, जिम्मेदार कौन ?*
*बल्लभ भवन मंत्रालय में बैठकर आदेश देना आसान है, चम्बल की जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं मंत्री मुख्यमंत्री*
_विवेक तिवारी_
मुरैना । *परिवहन चेकपोस्ट अमले पर पेट माफिया के बार बार हमले के बाद निरंकुश होकर एक और हमला होने का जिम्मेदार कौन है ? मध्यप्रदेश की राजधानी बल्लभ भवन मंत्रालय में बैठकर आदेश देना आसान है, लेकिन चम्बल के माफिया की जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं शासन और सरकार मंत्री, मुख्यमंत्री एवं न्याय व्यवस्था । चम्बल बीहड़ और बागियों के लिए विश्व पटल पर विख्यात है । यहां जितने लाईसेंसी हथियार हैं उससे चार गुना अवैध हथियारों से तो यहां के छोरे खेलते हैं । आज भी चम्बल का क्राइम रिकॉर्ड करीब 15 राज्यों में सबसे अधिक है ।*
बीते रोज माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से मुरैना में बिना नंबर प्लेट वाहनों की चेकिंग के दौरान एक बार फिर परिवहन अमले पर पेट माफिया ने हमला कर दिया । ट्रैक्टर ट्राली चालक ने विक्रम नगर के पास परिवहन उपनिरीक्षक श्रीमती मीनाक्षी गोखले की स्कॉर्पियों में टक्कर मार दी , परिवहन चेकपोस्ट के कर्मचारियों ने पीछा कर ट्रैक्टर ट्राली को पकड़ लिया लेकिन ट्रैक्टर चालक भागने में सफल हो गया । इस हमले में अधिकारी और कर्मचारी बाल बाल बचे । सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है । लेकिन सवाल ये है कि पुलिस, वन विभाग, खनिज, परिवहन विभाग अमला तथा अतिरिक्त बल होने के बाद भी अवैध खनन पर अंकुश क्यों नहीं लग रहा है ?
जबाव सीधा है कि स्थानीय तथाकथित खद्दर धारियों का संरक्षण, सत्ता तक पहुंच का रसूख, लाचार कानून एवं न्याय व्यवस्था तथा सत्ता में बैठे सियासद्दानों का वरदहस्त की वजह से प्रशासनिक व्यवस्था पर माफिया हावी है । मंत्रालय में बैठकर बोलवचन करना, आदेश पारित करना, निर्देश देना आसान है लेकिन असल सच्चाई सबके सामने है ।
हमने 3 जून 2026 को ही खबर के माध्यम से सिस्टम और शासन को चेताया था, कि ऐसी घटना या हमला हो सकता है लेकिन खबर को गंभीरता से नहीं लिया । परिणाम सबके सामने है ।
*कब कहां किस पर हुआ पेट माफिया का हमला*
केवल चम्बल के मुरैना क्षेत्र में ही प्रशासनिक तथा कानूनी अमले पर करीब दर्जनभर हमले हो चुके हैं । यहां बता दें कि मुरैना में अवैध उत्खनन करने वालों को वोट बैंक की खातिर कुछ नेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है जिसके कारण वह न किसी की जान की परवाह करते हैं न ही घर उजाड़ने की । यहां आईपीएस अधिकारी तक को भी नहीं बक्शा कौन सी घटना हुई है उसकी जानकारी और बहुत सी ऐसी घटना है जिनको भुला दिया गया है तथा सरकारी आंकड़ों में जिन्हें जगह तक नहीं मिली !
*(1),* नरेंद्र कुमार सिंह IPS अधिकारी 8 मार्च 2012 में होली वाले दिन बामोर अवैध पत्थर, रेत के ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या।
*(2),* धर्मेंद्र चौहान पुलिस आरक्षक 5 अप्रैल 2014 सराय छोला इलाका। रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया था।
*(3),* सूबेदार सिंह कुशवाह डिप्टी रेंजर (वन विभाग) 6 मार्च 2018 घिरौना मंदिर वनचौकी के पास (धौलपुर रोड) ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या।
*(4),* नरेंद्र शर्मा वनरक्षक 6 मार्च 2018 रायरू के पास, रेत माफिया के ट्रैक्टर ने टक्कर मारी थी।
*(5),* 15अज्ञात लोग आम नागरिक 21 जून 2018 रामपुर इलाके में रेत से लदे ट्रैक्टर और एक तूफान जीप की भीषण टक्कर में एक ही परिवार के 15 लोगों की मौत हुई थी।
*(6),* मुकेश दुबे RTI कार्यकर्ता 26 सितंबर 2017 मुरैना की खनन और भ्रष्टाचार के खुलासे के कारण हत्या।
*(7),* हरकेश गुर्जर वनरक्षक 8 अप्रैल 2026 रानपुर गांव चौराहा (दिमनी/अंबाह क्षेत्र) कार्रवाई के दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या।
*(8),* महिला फोरेस्ट अधिकारी श्रद्धा पांढ़रे पर भी 2021 में करीब पांच बार हमले किए गए थे, हालांकि वे सुरक्षित रहीं ।
चम्बल के मुरैना क्षेत्र में रेत माफिया के कारण या उसके द्वारा हुई कुल मौतों का कोई एक सरकारी “आधिकारिक संचयी आंकड़ा” मिलना कठिन है, !

